अन्वयः
महाप्राज्ञः sagacious one, सूतः charioteer, राममेव to Rama only, अनुशोचन्तम् grieving, परमाकुल चेतनम् extremely agitated mind, आलोक्य तु having seen, प्राञ्जलिः with folded palms, आसदत् approached.
Summary
Seeing the king brooding over Rama, in an extremely agitated state, the sagacious charioteer approached him with folded hands.
पदच्छेदः
| आलोक्य | आलोक्य (√आ-लोकय् + ल्यप्) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| महाप्राज्ञः | महत्–प्राज्ञ (१.१) |
| परमाकुलचेतसं | परम–आकुल–चेतस् (२.१) |
| रामम् | राम (२.१) |
| एवानुशोचन्तं | एव (अव्ययः)–अनुशोचत् (√अनु-शुच् + शतृ, २.१) |
| सूतः | सूत (१.१) |
| प्राञ्जलिर् | प्राञ्जलि (१.१) |
| आसदत् | आसदत् (√आ-सद् प्र.पु. एक.) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| आ | लो | क्य | तु | म | हा | प्रा | ज्ञः |
| प | र | मा | कु | ल | चे | त | सम् |
| रा | म | मे | वा | नु | शो | च | न्तं |
| सू | तः | प्रा | ञ्ज | लि | रा | स | दत् |