अन्वयः
सहसा suddenly, राजवेश्मनि in the palace, भूषणध्वनिमूर्छितः mingled with the (tinkling) sounds of ornaments, हा हा राम इति alas, alas, Rama, स्त्री सहस्रनिनादश्च wailing of a thousand women, संजज्ञे was produced.
Summary
All on a sudden there arose from (the mouths of) a thousand women of the palace cries of 'alas, alas, Rama' mingled with the tinkling sounds of their ornaments.
पदच्छेदः
| स्त्रीसहस्रनिनादश् | स्त्री–सहस्र–निनाद (१.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| संजज्ञे | संजज्ञे (√सम्-जन् लिट् प्र.पु. एक.) |
| राजवेश्मनि | राजन्–वेश्मन् (७.१) |
| हा | हा (अव्ययः) |
| हा | हा (अव्ययः) |
| रामेति | राम (८.१)–इति (अव्ययः) |
| सहसा | सहस् (३.१) |
| भूषणध्वनिमूर्छितः | भूषण–ध्वनि–मूर्छित (√मूर्छय् + क्त, १.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| स्त्री | स | ह | स्र | नि | ना | द | श्च |
| सं | ज | ज्ञे | रा | ज | वे | श्म | नि |
| हा | हा | रा | मे | ति | स | ह | सा |
| भू | ष | ण | ध्व | नि | मू | र्छि | तः |