अद्य त्विदानीं रजनीं पुत्र मा गच्छ सर्वथा ।
मातरं मां च संपश्यन्वसेमामद्य शर्वरीम् ।
तर्पितः सर्वकामैस्त्वं श्वःकाले साधयिष्यसि ॥
अद्य त्विदानीं रजनीं पुत्र मा गच्छ सर्वथा ।
मातरं मां च संपश्यन्वसेमामद्य शर्वरीम् ।
तर्पितः सर्वकामैस्त्वं श्वःकाले साधयिष्यसि ॥
अन्वयः
मातरम् mother, मां च me also, सम्पश्यन् seeing, अद्य today, इमाम् this, शर्वरीम् night, वस stay, सर्वकामैः with all desires, तर्पितः satisfied, त्वम् you, श्वः tomorrow, काले in proper time, साधयिष्यसि set out.Summary
Stay tonight in the company of your mother and me. With all our desire satisfied, you can set out tomorrow at the appropriate time.पदच्छेदः
| अद्य | अद्य (अव्ययः) |
| त्व् | तु (अव्ययः) |
| इदानीं | इदानीम् (अव्ययः) |
| रजनीं | रजनी (२.१) |
| पुत्र | पुत्र (८.१) |
| मा | मा (अव्ययः) |
| गच्छ | गच्छ (√गम् लोट् म.पु. ) |
| सर्वथा | सर्वथा (अव्ययः) |
| मातरं | मातृ (२.१) |
| मां | मद् (२.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| संपश्यन् | संपश्यत् (√सम्-पश् + शतृ, १.१) |
| वसेमाम् | वस (√वस् लोट् म.पु. )–इदम् (२.१) |
| अद्य | अद्य (अव्ययः) |
| शर्वरीम् | शर्वरी (२.१) |
| तर्पितः | तर्पित (√तर्पय् + क्त, १.१) |
| सर्वकामैस् | सर्व–काम (३.३) |
| त्वं | त्वद् (१.१) |
| श्वःकाले | श्वःकाल (७.१) |
| साधयिष्यसि | साधयिष्यसि (√साधय् लृट् म.पु. ) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | द्य | त्वि | दा | नीं | र | ज | नीं | पु | त्र | मा | ग |
| च्छ | स | र्व | था | मा | त | रं | मां | च | सं | प | श्य |
| न्व | से | मा | म | द्य | श | र्व | रीम् | त | र्पि | तः | स |
| र्व | का | मै | स्त्वं | श्वः | का | ले | सा | ध | यि | ष्य | सि |