अन्वयः
अद्य today, यान् गुणान् merit, प्राप्स्यामि obtain, तान् those, श्वः tomorrow, मे to me, कः who, प्रदास्यति will give, अतः therefore, सर्वकामैः with all desires, अपक्रमणमेव departing, अहम् I, वृणे am seeking.
Summary
Who will give me the merit (of propriety) I earn today? Therefore, I want to depart (today), discarding all my desires.
पदच्छेदः
| प्राप्स्यामि | प्राप्स्यामि (√प्र-आप् लृट् उ.पु. ) |
| यान् | यद् (२.३) |
| अद्य | अद्य (अव्ययः) |
| गुणान् | गुण (२.३) |
| को | क (१.१) |
| मे | मद् (४.१) |
| श्वस्तान् | श्वस्त (√श्वस् + क्त, २.३) |
| प्रदास्यति | प्रदास्यति (√प्र-दा लृट् प्र.पु. एक.) |
| अपक्रमणम् | अपक्रमण (२.१) |
| एवातः | एव (अव्ययः)–अतस् (अव्ययः) |
| सर्वकामैर् | सर्व–काम (३.३) |
| अहं | मद् (१.१) |
| वृणे | वृणे (√वृ लट् उ.पु. ) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| प्रा | प्स्या | मि | या | न | द्य | गु | णा |
| न्को | मे | श्व | स्ता | न्प्र | दा | स्य | ति |
| अ | प | क्र | म | ण | मे | वा | तः |
| स | र्व | का | मै | र | हं | वृ | णे |