अन्वयः
महारण्यम् to wild forest, गमिष्यति he will go, जगतीपते O Lord of the world, सर्वैः by all, राजगुणैः princely virtues, वृतम् embellisted with, तम् he, रश्मिभिः (encircled) by rays, आदित्यमिव like the Sun, पश्य see.
Summary
O Lord of the world behold him embellished with all princely virtues like the Sun encircled with its rays, (now) leaving for the forest.
पदच्छेदः
| गमिष्यति | गमिष्यति (√गम् लृट् प्र.पु. एक.) |
| महारण्यं | महत्–अरण्य (२.१) |
| तं | तद् (२.१) |
| पश्य | पश्य (√पश् लोट् म.पु. ) |
| जगतीपते | जगतीपति (८.१) |
| वृतं | वृत (√वृ + क्त, २.१) |
| राजगुणैः | राजन्–गुण (३.३) |
| सर्वैर् | सर्व (३.३) |
| आदित्यम् | आदित्य (२.१) |
| इव | इव (अव्ययः) |
| रश्मिभिः | रश्मि (३.३) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| ग | मि | ष्य | ति | म | हा | र | ण्यं |
| तं | प | श्य | ज | ग | ती | प | ते |
| वृ | तं | रा | ज | गु | णैः | स | र्वै |
| रा | दि | त्य | मि | व | र | श्मि | भिः |