क्रीडितस्त्वेष नः पुत्रान्बालानुद्भ्रान्तचेतनः ।
सरय्वां प्रक्षिपन्मौर्ख्यादतुलां प्रीतिमश्नुते ॥
क्रीडितस्त्वेष नः पुत्रान्बालानुद्भ्रान्तचेतनः ।
सरय्वां प्रक्षिपन्मौर्ख्यादतुलां प्रीतिमश्नुते ॥
अन्वयः
उद्भ्रान्तचेतनः with an insane mind, एषः this one, क्रीडतः while playing, बालान् young ones, नः our, पुत्रान् sons, सरय्वाम् in Sarayu river, प्रक्षिपन् while throwing, मौर्ख्यात् in his insanity, अतुलाम् incomparable, प्रीतिम् pleasure, अश्नुते deriving.Summary
That insane (Asamanjasa) while throwing our children who were playing around into Sarayu river in his insanity derived incomparable pleasure'.पदच्छेदः
| क्रीडितस् | क्रीडित (√क्रीड् + क्त, १.१) |
| त्व् | तु (अव्ययः) |
| एष | एतद् (१.१) |
| नः | मद् (६.३) |
| पुत्रान् | पुत्र (२.३) |
| बालान् | बाल (२.३) |
| उद्भ्रान्तचेतनः | उद्भ्रान्त (√उत्-भ्रम् + क्त)–चेतना (१.१) |
| सरय्वां | सरयू (७.१) |
| प्रक्षिपन् | प्रक्षिपत् (√प्र-क्षिप् + शतृ, १.१) |
| मौर्ख्याद् | मौर्ख्य (५.१) |
| अतुलां | अतुल (२.१) |
| प्रीतिम् | प्रीति (२.१) |
| अश्नुते | अश्नुते (√अश् लट् प्र.पु. एक.) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| क्री | डि | त | स्त्वे | ष | नः | पु | त्रा |
| न्बा | ला | नु | द्भ्रा | न्त | चे | त | नः |
| स | र | य्वां | प्र | क्षि | प | न्मौ | र्ख्या |
| द | तु | लां | प्री | ति | म | श्नु | ते |