अन्वयः
सः नराधिपः that king, तेषां प्रकृतीनाम् of those subjects, वचनम् words, श्रुत्वा having heard, तासाम् to all of them, प्रियचिकीर्षया with the intention of pleasing them, अहितम् malevolent, तं पुत्रम् that son, तत्याज banished.
Summary
That king (Sagara) heard the words of the citizens and with the intention of doing good to them, banished that malevolent son.
पदच्छेदः
| स | तद् (१.१) |
| तासां | तद् (६.३) |
| वचनं | वचन (२.१) |
| श्रुत्वा | श्रुत्वा (√श्रु + क्त्वा) |
| प्रकृतीनां | प्रकृति (६.३) |
| नराधिप | नराधिप (८.१) |
| तं | तद् (२.१) |
| तत्याजाहितं | तत्याज (√त्यज् लिट् प्र.पु. एक.)–अहित (२.१) |
| पुत्रं | पुत्र (२.१) |
| तासां | तद् (६.३) |
| प्रियचिकीर्षया | प्रिय–चिकीर्षा (३.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| स | ता | सां | व | च | नं | श्रु | त्वा |
| प्र | कृ | ती | नां | न | रा | धि | प |
| तं | त | त्या | जा | हि | तं | पु | त्रं |
| ता | सां | प्रि | य | चि | की | र्ष | या |