अन्वयः
पुण्येषु holy, देशेषु places, यजन् while performing sacrifices, आप्तदक्षिणाः appropriate gifts, विसृजंश्च liberally givng, ऋषिभिः with sages, समागम्य meeting, वने in the forest, सुखम् happily, प्रवत्स्यति he will live.
Summary
Performing sacrifices in the holy places and liberally giving appropriate gifts, Rama will live happily in the forest in the company of sages.
पदच्छेदः
| यजन् | यजत् (√यज् + शतृ, १.१) |
| पुण्येषु | पुण्य (७.३) |
| देशेषु | देश (७.३) |
| विसृजंश् | विसृजत् (√वि-सृज् + शतृ, १.१) |
| चाप्तदक्षिणाः | च (अव्ययः)–आप्त–दक्षिणा (२.३) |
| ऋषिभिश् | ऋषि (३.३) |
| च | च (अव्ययः) |
| समागम्य | समागम्य (√समा-गम् + ल्यप्) |
| प्रवत्स्यति | प्रवत्स्यति (√प्र-वस् लृट् प्र.पु. एक.) |
| सुखं | सुखम् (अव्ययः) |
| वने | वन (७.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| य | ज | न्पु | ण्ये | षु | दे | शे | षु |
| वि | सृ | जं | श्चा | प्त | द | क्षि | णाः |
| ऋ | षि | भि | श्च | स | मा | ग | म्य |
| प्र | व | त्स्य | ति | सु | खं | व | ने |