अन्वयः
काकुत्स्थे scion of the Kakutsthas (Dasaratha), एवम् in this way, ब्रुवति while saying, कैकेय्याः Kaikeyi, भयम् fear, आगतम् entered, मुखं चापि her face also, शोषम् dryness, आगमत् obtained, स्वरश्चापि even her voice, न्यरुध्यत choked.
Summary
While Dasaratha was saying these words, Kaikeyi was gripped by fear and her face looked pale. Even her voice got choked.
पदच्छेदः
| एवं | एवम् (अव्ययः) |
| ब्रुवति | ब्रुवत् (√ब्रू + शतृ, ७.१) |
| काकुत्स्थे | काकुत्स्थ (७.१) |
| कैकेय्या | कैकेयी (६.१) |
| भयम् | भय (१.१) |
| आगतम् | आगत (√आ-गम् + क्त, १.१) |
| मुखं | मुख (२.१) |
| चाप्य् | च (अव्ययः)–अपि (अव्ययः) |
| अगमच्छोषं | अगमत् (√गम् प्र.पु. एक.)–शोष (२.१) |
| स्वरश् | स्वर (१.१) |
| चापि | च (अव्ययः)–अपि (अव्ययः) |
| न्यरुध्यत | न्यरुध्यत (√नि-रुध् प्र.पु. एक.) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| ए | वं | ब्रु | व | ति | का | कु | त्स्थे |
| कै | के | य्या | भ | य | मा | ग | तम् |
| मु | खं | चा | प्य | ग | मा | च्छो | षं |
| स्व | र | श्चा | पि | न्य | रु | ध्य | त |