अन्वयः
सः ऐक्ष्वाकः that descendant of the Ikshvakus (Dasaratha), उष्णम् निःश्वस्य heaving hot sighs, भार्याम् to his wife (Kaikeyi), इदम् these words, अब्रवीत् he spoke, कैकेयी O Kaikeyi, सीता Sita, कुशचीरेण with kusa garment, गन्तुम् to go, नार्हति is not worthy of.
Summary
The descendant of the Ikshvakus (Dasaratha), heaving hot sighs, said to his wife O Kaikeyi, Sita does not deserve to go (to the forest) in garment of kusa grass.
पदच्छेदः
| स | तद् (१.१) |
| निःश्वस्योष्णम् | निःश्वस्य (√निः-श्वस् + ल्यप्)–उष्ण (२.१) |
| ऐक्ष्वाकस् | ऐक्ष्वाक (१.१) |
| तां | तद् (२.१) |
| भार्याम् | भार्या (२.१) |
| इदम् | इदम् (२.१) |
| अब्रवीत् | अब्रवीत् (√ब्रू लङ् प्र.पु. एक.) |
| कैकेयि | कैकेयी (८.१) |
| कुशचीरेण | कुश–चीर (३.१) |
| न | न (अव्ययः) |
| सीता | सीता (१.१) |
| गन्तुम् | गन्तुम् (√गम् + तुमुन्) |
| अर्हति | अर्हति (√अर्ह् लट् प्र.पु. एक.) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| स | निः | श्व | स्यो | ष्ण | मै | क्ष्वा | क |
| स्तां | भा | र्या | मि | द | म | ब्र | वीत् |
| कै | के | यि | कु | श | ची | रे | ण |
| न | सी | ता | ग | न्तु | म | र्ह | ति |