अन्वयः
वनम् to the forest, सम्प्रस्थितः set out to forest, रामः Rama, एवम् in this way, ब्रुवन्तम् speaking, अवाक्छिरसमम् with bowed head, आसीनम् sitting, पितरम् addressing his father, इदं वचनम् these words, अब्रवीत् said.
Summary
Having heard the words of Rama, thus spoke Sita in a faint voice in sadness, with tears flowing incessantly from her eyes:
पदच्छेदः
| एवं | एवम् (अव्ययः) |
| ब्रुवन्तं | ब्रुवत् (√ब्रू + शतृ, २.१) |
| पितरं | पितृ (२.१) |
| रामः | राम (१.१) |
| सम्प्रस्थितो | सम्प्रस्थित (√सम्प्र-स्था + क्त, १.१) |
| वनम् | वन (२.१) |
| अवाक्शिरसम् | अवाक्शिरस् (२.१) |
| आसीनम् | आसीन (√आस् + क्त, २.१) |
| इदं | इदम् (२.१) |
| वचनम् | वचन (२.१) |
| अब्रवीत् | अब्रवीत् (√ब्रू लङ् प्र.पु. एक.) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| ए | वं | ब्रु | व | न्तं | पि | त | रं |
| रा | मः | सं | प्र | स्थि | तो | व | नम् |
| अ | वा | क्शि | र | स | मा | सी | न |
| मि | दं | व | च | न | म | ब्र | वीत् |