अन्वयः
राजन् O king, त्यक्तभोगस्य of forsaker of pleasures, सर्वतः entirely, त्यक्तसङ्गस्य of one who has given up attachments, वने in the forest, वन्येन available in the forest, जीवतः subsisting, मे for me, अनुयात्रेण followers, किं कार्यम् what is the use?
Summary
O king giving up pleasures and attachments altogether I am going to live on whatever is available in the forest. What is the use of followers?
पदच्छेदः
| त्यक्तभोगस्य | त्यक्त (√त्यज् + क्त)–भोग (६.१) |
| मे | मद् (६.१) |
| राजन् | राजन् (८.१) |
| वने | वन (७.१) |
| वन्येन | वन्य (३.१) |
| जीवतः | जीवत् (√जीव् + शतृ, ६.१) |
| किं | क (१.१) |
| कार्यम् | कार्य (√कृ + कृत्, १.१) |
| अनुयात्रेण | अनुयात्र (३.१) |
| त्यक्तसङ्गस्य | त्यक्त (√त्यज् + क्त)–सङ्ग (६.१) |
| सर्वतः | सर्वतस् (अव्ययः) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| त्य | क्त | भो | ग | स्य | मे | रा | ज |
| न्व | ने | व | न्ये | न | जी | व | तः |
| किं | का | र्य | म | नु | या | त्रे | ण |
| त्य | क्त | स | ङ्ग | स्य | स | र्व | तः |