अन्वयः
विनयज्ञः knower of politeness, रामः Rama, महामात्रवचः minister's words, श्रुत्वा having heard, तदा then, दशरथम् Dasaratha, विनीतवत् humbly, वाक्यम् words, अभ्यभाषत spoke.
Summary
On hearing the minister, Rama who knew how to be polite spoke these words to Dasaratha humbly:
पदच्छेदः
| महामात्रवचः | महामात्र–वचस् (२.१) |
| श्रुत्वा | श्रुत्वा (√श्रु + क्त्वा) |
| रामो | राम (१.१) |
| दशरथं | दशरथ (२.१) |
| तदा | तदा (अव्ययः) |
| अन्वभाषत | अन्वभाषत (√अनु-भाष् लङ् प्र.पु. एक.) |
| वाक्यं | वाक्य (२.१) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| विनयज्ञो | विनय–ज्ञ (१.१) |
| विनीतवत् | विनीत (√वि-नी + क्त)–वत् (अव्ययः) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| म | हा | मा | त्र | व | चः | श्रु | त्वा |
| रा | मो | द | श | र | थं | त | दा |
| अ | न्व | भा | ष | त | वा | क्यं | तु |
| वि | न | य | ज्ञो | वि | नी | त | वत् |