अन्वयः
अथ then, कौशेयवासिनी wearing silk clothes, सीता Sita, आत्मपरिधानार्थम् meant for her to wear, चीरम् bark robes, समीक्ष्य having seen, पृषती doe, वागुरामिव like a (fowler's) snare, सन्त्रस्ता was frightened.
Summary
Then Sita in silk clothes glanced at the bark robes meant for her to wear and was frightened like a doe seeing a (fowler's) snare.
पदच्छेदः
| अथात्मपरिधानार्थं | अथ (अव्ययः)–आत्मन्–परिधान–अर्थ (२.१) |
| सीता | सीता (१.१) |
| कौशेयवासिनी | कौशेय–वासिन् (१.१) |
| समीक्ष्य | समीक्ष्य (√सम्-ईक्ष् + ल्यप्) |
| चीरं | चीर (२.१) |
| संत्रस्ता | संत्रस्त (√सम्-त्रस् + क्त, १.१) |
| पृषती | पृषती (१.१) |
| वागुराम् | वागुरा (२.१) |
| इव | इव (अव्ययः) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| अ | था | त्म | प | रि | धा | ना | र्थं |
| सी | ता | कौ | शे | य | वा | सि | नी |
| स | मी | क्ष्य | ची | रं | सं | त्र | स्ता |
| पृ | ष | ती | वा | गु | रा | मि | व |