अन्वयः
लक्ष्मणश्चापि Lakshmana also, तत्रैव there only, पितुः father's, अग्रतः in front (presence), शुभे auspicious, वसने raiment, विहाय having discarded, तपसाच्छादने चैव the clothing of an ascetic, जग्राह accepted.
Summary
Lakshmana also removed his auspicious raiment in front (presence) of his father and accepted (put on) the robes of an ascetic.
पदच्छेदः
| लक्ष्मणश् | लक्ष्मण (१.१) |
| चापि | च (अव्ययः)–अपि (अव्ययः) |
| तत्रैव | तत्र (अव्ययः)–एव (अव्ययः) |
| विहाय | विहाय (√वि-हा + ल्यप्) |
| वसने | वसन (२.२) |
| शुभे | शुभ (२.२) |
| तापसाच् | तापस (५.१) |
| छादने | छादन (२.२) |
| चैव | च (अव्ययः)–एव (अव्ययः) |
| जग्राह | जग्राह (√ग्रह् लिट् प्र.पु. एक.) |
| पितुर् | पितृ (६.१) |
| अग्रतः | अग्रतस् (अव्ययः) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| ल | क्ष्म | ण | श्चा | पि | त | त्रै | व |
| वि | हा | य | व | स | ने | शु | भे |
| ता | प | सा | च्छा | द | ने | चै | व |
| ज | ग्रा | ह | पि | तु | र | ग्र | तः |