अन्वयः
राजा the king, देशकालज्ञो aware of (the right) place and time, निश्चितम् firm, सर्वतः in every way, शुचिम् honest, वित्तसञ्चये in the treasury, व्यापृतम् working as officer, सत्वरम् hurriedly, आहूय having summoned, उवाच said.
Summary
The king who was aware of the right place and time summoned hurriedly the treaury officer, who was firm and honest and said to him:
पदच्छेदः
| राजा | राजन् (१.१) |
| सत्वरम् | सत्वर (२.१) |
| आहूय | आहूय (√आ-ह्वा + ल्यप्) |
| व्यापृतं | व्यापृत (२.१) |
| वित्तसंचये | वित्त–संचय (७.१) |
| उवाच | उवाच (√वच् लिट् प्र.पु. एक.) |
| देशकालज्ञो | देश–काल–ज्ञ (१.१) |
| निश्चितं | निश्चितम् (अव्ययः) |
| सर्वतः | सर्वतस् (अव्ययः) |
| शुचि | शुचि (१.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| रा | जा | स | त्व | र | मा | हू | य |
| व्या | पृ | तं | वि | त्त | सं | च | ये |
| उ | वा | च | दे | श | का | ल | ज्ञो |
| नि | श्चि | तं | स | र्व | तः | शु | चि |