अन्वयः
परमधर्मात्मा extremely virtuous, रामः Rama, मातृमध्ये in the midst of his mothers, अतिसत्कृताम् highly revered lady, ताम् that, मातरम् to mother (Kausalya), प्राञ्जलिः with folded hands, अभिक्रम्य having approached, वाक्यम् words, अब्रवीत् said.
Summary
Most virtuous Rama approached his mother, that highly revered lady among all his mothers, and with folded hands said:
पदच्छेदः
| तां | तद् (२.१) |
| प्राञ्जलिर् | प्राञ्जलि (१.१) |
| अभिक्रम्य | अभिक्रम्य (√अभि-क्रम् + ल्यप्) |
| मातृमध्ये | मातृ–मध्ये (अव्ययः) |
| ऽतिसत्कृताम् | अति (अव्ययः)–सत्कृत (√सत्-कृ + क्त, २.१) |
| रामः | राम (१.१) |
| परमधर्मज्ञो | परम–धर्म–ज्ञ (१.१) |
| मातरं | मातृ (२.१) |
| वाक्यम् | वाक्य (२.१) |
| अब्रवीत् | अब्रवीत् (√ब्रू लङ् प्र.पु. एक.) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| तां | प्रा | ञ्ज | लि | र | भि | क्र | म्य |
| मा | तृ | म | ध्ये | ऽति | स | त्कृ | ताम् |
| रा | मः | प | र | म | ध | र्म | ज्ञो |
| मा | त | रं | वा | क्य | म | ब्र | वीत् |