अन्वयः
सः he, अभिनीतार्थम् with highly polished meaning, एतावत् up to this extent, वचः words, उक्त्वा having spoken, आवेक्ष्य after looking at them, त्रयः three, त्रयश्शतशतार्धा: three hundred and fifty, मातरः च mothers, ददर्श he saw.
Summary
Speaking thus to his mother with highly polished words, he then turned his gaze at his other three hundred and fifty mothers.
पदच्छेदः
| एतावद् | एतावत् (२.१) |
| अभिनीतार्थम् | अभिनीत (√अभि-नी + क्त)–अर्थ (२.१) |
| उक्त्वा | उक्त्वा (√वच् + क्त्वा) |
| स | तद् (१.१) |
| जननीं | जननी (२.१) |
| वचः | वचस् (२.१) |
| त्रयः | त्रि (१.३) |
| शतशतार्धा | शत–शतार्ध (२.३) |
| हि | हि (अव्ययः) |
| ददर्शावेक्ष्य | ददर्श (√दृश् लिट् प्र.पु. एक.)–अवेक्ष्य (√अव-ईक्ष् + ल्यप्) |
| मातरः | मातृ (१.३) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| ए | ता | व | द | भि | नी | ता | र्थ |
| मु | क्त्वा | स | ज | न | नीं | व | चः |
| त्र | यः | श | त | श | ता | र्धा | हि |
| द | द | र्शा | वे | क्ष्य | मा | त | रः |