संज्ञां तु प्रतिलभ्यैव मुहूर्तात्स महीपतिः ।
नेत्राभ्यामश्रुपूर्णाभ्यां सुमन्त्रमिदमब्रवीत् ॥
संज्ञां तु प्रतिलभ्यैव मुहूर्तात्स महीपतिः ।
नेत्राभ्यामश्रुपूर्णाभ्यां सुमन्त्रमिदमब्रवीत् ॥
अन्वयः
सः महीपतिः that Lord of the world (king), मुहूर्तात् after a moment, संज्ञाम् senses, प्रतिलभ्यैव having regained, अश्रुपूर्णाभ्याम् filled with tears, नेत्राभ्याम् with eyes, सुमन्त्रम् to Sumanatra, इदम् these words, अब्रवीत् spoke.Summary
Regaining his senses in a moment, the king, with eyes filled with tears, said to Sumantra:पदच्छेदः
| संज्ञां | संज्ञा (२.१) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| प्रतिलभ्यैव | प्रतिलभ्य (√प्रति-लभ् + ल्यप्)–एव (अव्ययः) |
| मुहूर्तात् | मुहूर्त (५.१) |
| स | तद् (१.१) |
| महीपतिः | महीपति (१.१) |
| नेत्राभ्याम् | नेत्र (३.२) |
| अश्रुपूर्णाभ्यां | अश्रु–पूर्ण (√पृ + क्त, ३.२) |
| सुमन्त्रम् | सुमन्त्र (२.१) |
| इदम् | इदम् (२.१) |
| अब्रवीत् | अब्रवीत् (√ब्रू लङ् प्र.पु. एक.) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| सं | ज्ञां | तु | प्र | ति | ल | भ्यै | व |
| मु | हू | र्ता | त्स | म | ही | प | तिः |
| ने | त्रा | भ्या | म | श्रु | पू | र्णा | भ्यां |
| सु | म | न्त्र | मि | द | म | ब्र | वीत् |