अन्वयः
लक्ष्मण O Lakshmana, यः त्वम् such as you, प्रियवादिनम् who speaks pleasant words, देवसङ्काशम् godlike, भ्रातरम् to brother, सततम् always, परिचरिष्यसि attend, सिद्धार्थः fulfilled the purpose, अहो oh.
Summary
With your desires fulfilled, O Lakshmana, you will attend to your godlike brother who always speaks pleasant words.
पदच्छेदः
| अहो | अहो (अव्ययः) |
| लक्ष्मण | लक्ष्मण (८.१) |
| सिद्धार्थः | सिद्धार्थ (१.१) |
| सततं | सततम् (अव्ययः) |
| प्रियवादिनम् | प्रिय–वादिन् (२.१) |
| भ्रातरं | भ्रातृ (२.१) |
| देवसंकाशं | देव–संकाश (२.१) |
| यस् | यद् (१.१) |
| त्वं | त्वद् (१.१) |
| परिचरिष्यसि | परिचरिष्यसि (√परि-चर् लृट् म.पु. ) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| अ | हो | ल | क्ष्म | ण | सि | द्धा | र्थः |
| स | त | तां | प्रि | य | वा | दि | नम् |
| भ्रा | त | रं | दे | व | सं | का | शं |
| य | स्त्वं | प | रि | च | रि | ष्य | सि |