अथ राजा वृतः स्त्रीभिर्दीनाभिर्दीनचेतनः ।
निर्जगाम प्रियं पुत्रं द्रक्ष्यामीति ब्रुवन्गृहात् ॥
अथ राजा वृतः स्त्रीभिर्दीनाभिर्दीनचेतनः ।
निर्जगाम प्रियं पुत्रं द्रक्ष्यामीति ब्रुवन्गृहात् ॥
अन्वयः
अथ then, दीनचेतनः in desolation, राजा king, प्रियम् beloved, पुत्रम् son, द्रक्ष्यामीति I wish to see him, ब्रुवन् saying, दीनाभिः distressed, स्त्रीभिः by ladies, वृतः surrounded, गृहात् from the palace, निर्जगाम emerged.Summary
I wish to see my beloved son said the king with a sense of desolation and emerged, surrounded by forlorn women, from the palace.पदच्छेदः
| अथ | अथ (अव्ययः) |
| राजा | राजन् (१.१) |
| वृतः | वृत (√वृ + क्त, १.१) |
| स्त्रीभिर् | स्त्री (३.३) |
| दीनाभिर् | दीन (३.३) |
| दीनचेतनः | दीन–चेतना (१.१) |
| निर्जगाम | निर्जगाम (√निः-गम् लिट् प्र.पु. एक.) |
| प्रियं | प्रिय (२.१) |
| पुत्रं | पुत्र (२.१) |
| द्रक्ष्यामीति | द्रक्ष्यामि (√दृश् लृट् उ.पु. )–इति (अव्ययः) |
| ब्रुवन् | ब्रुवत् (√ब्रू + शतृ, १.१) |
| गृहात् | गृह (५.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | थ | रा | जा | वृ | तः | स्त्री | भि |
| र्दी | ना | भि | र्दी | न | चे | त | नः |
| नि | र्ज | गा | म | प्रि | यं | पु | त्रं |
| द्र | क्ष्या | मी | ति | ब्रु | व | न्गृ | हात् |