अन्वयः
यानार्हौ worthy of going on chariot, पदातिनौ (now) going on foot, सुखोचितौ accustomed to comforts, अदु:खार्हौ unworthy of experiencing sorrow, दृष्ट्वा having seen, शीघ्रम् swiftly, याहि इति 'go' thus, सारथिम् of charioteer, सञ्चोदयामास urged.
Summary
Seeing his parents, who were worthy of riding a chariot now going on foot, who were accustomed to comforts and did not deserve any suffering, Rama urged his charioteer to drive fast.
पदच्छेदः
| पदातिनौ | पदातिन् (२.२) |
| च | च (अव्ययः) |
| यानार्हाव् | यान–अर्ह (२.२) |
| अदुःखार्हौ | अदुःख–अर्ह (२.२) |
| सुखोचितौ | सुख–उचित (२.२) |
| दृष्ट्वा | दृष्ट्वा (√दृश् + क्त्वा) |
| संचोदयामास | संचोदयामास (√सम्-चोदय् प्र.पु. एक.) |
| शीघ्रं | शीघ्रम् (अव्ययः) |
| याहीति | याहि (√या लोट् म.पु. )–इति (अव्ययः) |
| सारथिम् | सारथि (२.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| प | दा | ति | नौ | च | या | ना | र्हा |
| व | दुः | खा | र्हौ | सु | खो | चि | तौ |
| दृ | ष्ट्वा | सं | चो | द | या | मा | स |
| शी | घ्रं | या | ही | ति | सा | र | थिम् |