अन्वयः
उपालब्धोऽपि even when reproached, नाश्रौषमिति 'I did not hear', राजानम् to the king, वक्ष्यसि you will tell, दुःखस्य agony, चिरम् for long time, पापिष्ठम् cannot be endured, इति thus, रामः Rama, तम् to him, अब्रवीत् said.
Summary
When the king reproaches you for not stopping the chariot, you can say 'I could not hear'.Prolonging agony is sinful, said Rama to Sumantra.
पदच्छेदः
| नाश्रौषम् | न (अव्ययः)–अश्रौषम् (√श्रु उ.पु. ) |
| इति | इति (अव्ययः) |
| राजानम् | राजन् (२.१) |
| उपालब्धो | उपालब्ध (१.१) |
| ऽपि | अपि (अव्ययः) |
| वक्ष्यसि | वक्ष्यसि (√वच् लृट् म.पु. ) |
| चिरं | चिरम् (अव्ययः) |
| दुःखस्य | दुःख (६.१) |
| पापिष्ठम् | पापिष्ठ (२.१) |
| इति | इति (अव्ययः) |
| रामस् | राम (१.१) |
| तम् | तद् (२.१) |
| अब्रवीत् | अब्रवीत् (√ब्रू लङ् प्र.पु. एक.) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| ना | श्रौ | ष | मि | ति | रा | जा | न |
| मु | पा | ल | ब्धो | ऽपि | व | क्ष्य | सि |
| चि | रं | दुः | ख | स्य | पा | पि | ष्ठ |
| मि | ति | रा | म | स्त | म | ब्र | वीत् |