अन्वयः
पुत्र O son, सुहृज्जने in beloved ones, स्वनुरक्तः deeply attached, वनवासाय to dwell in the forest, सृष्टः born , गच्छति leaving for the forest, भ्रातरि with regard to your brother, रामे of Rama, प्रमादम् inattention, मा कार्षीः never do.
Summary
Although deeply attached to your beloved ones, O Son, you are born to dwell in the forest. Never be inattentive towards your brother Rama who is on his way (to the forest).
पदच्छेदः
| सृष्टस् | सृष्ट (√सृज् + क्त, १.१) |
| त्वं | त्वद् (१.१) |
| वनवासाय | वन–वास (४.१) |
| स्वनुरक्तः | सु (अव्ययः)–अनुरक्त (√अनु-रञ्ज् + क्त, १.१) |
| सुहृज्जने | सुहृद्–जन (७.१) |
| रामे | राम (७.१) |
| प्रमादं | प्रमाद (२.१) |
| मा | मा (अव्ययः) |
| कार्षीः | कार्षीः (√कृ म.पु. ) |
| पुत्र | पुत्र (८.१) |
| भ्रातरि | भ्रातृ (७.१) |
| गच्छति | गच्छत् (√गम् + शतृ, ७.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| सृ | ष्ट | स्त्वं | व | न | वा | सा | य |
| स्व | नु | र | क्तः | सु | हृ | ज्ज | ने |
| रा | मे | प्र | मा | दं | मा | का | र्षीः |
| पु | त्र | भ्रा | त | रि | ग | च्छ | ति |