अन्वयः
वरदः one who confers boons, ते पुत्रः your son, क्षिप्रम् soon, अयोध्याम् to Ayodhya, पुनः again, आगतः having returned, मृदुपीनाभ्याम् tender and plump, पाणिभ्याम् hands, चरणौ your feet, पीडयिष्यति will press.
M N Dutt
And soon will your son conferring boons, returning (to this place), press your feet with those soft and plump hands of his.
Summary
Your son, bestower of boons, will soon return to Ayodhya and press your feet with his soft, tender hands.
पदच्छेदः
| पुत्रस् | पुत्र (१.१) |
| ते | त्वद् (६.१) |
| वरदः | वर–द (१.१) |
| क्षिप्रम् | क्षिप्रम् (अव्ययः) |
| अयोध्यां | अयोध्या (२.१) |
| पुनर् | पुनर् (अव्ययः) |
| आगतः | आगत (√आ-गम् + क्त, १.१) |
| कराभ्यां | कर (३.२) |
| मृदुपीनाभ्यां | मृदु–पीन (३.२) |
| चरणौ | चरण (२.२) |
| पीडयिष्यति | पीडयिष्यति (√पीडय् लृट् प्र.पु. एक.) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| पु | त्र | स्ते | व | र | दः | क्षि | प्र |
| म | यो | ध्यां | पु | न | रा | ग | तः |
| क | रा | भ्यां | मृ | दु | पी | ना | भ्यां |
| च | र | णौ | पी | ड | यि | ष्य | ति |