निशम्य तल्लक्ष्मणमातृवाक्यं; रामस्य मातुर्नरदेवपत्न्याः ।
सद्यः शरीरे विननाश शोकः; शरद्गतो मेघ इवाल्पतोयः ॥
निशम्य तल्लक्ष्मणमातृवाक्यं; रामस्य मातुर्नरदेवपत्न्याः ।
सद्यः शरीरे विननाश शोकः; शरद्गतो मेघ इवाल्पतोयः ॥
अन्वयः
तत् that, लक्ष्मणमातृवाक्यम् words of Lakshmana's mother, निशम्य having heard, नरदेवपत्न्या: queen, रामस्य मातुः of Rama's mother, शोकः grief, शरद्गतः relating to autumn, अल्पतोयः with slight moisture, मेघ इव like cloud, सद्यः instantly, शरीरे in the body, विननाश destroyed.M N Dutt
Hearing those words of Laksmana's mother, the wife of the best of men, Rāma's mother, had her sorrow destroyed in her person, even like and autumnal cloud surcharged with slight rain.Summary
On hearing the words of Lakshmana's mother the grief in the heart of the queen (Kausalya), mother of Rama, instantly disappeared like the autumnal cloud that holds but little rain. इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीय आदिकाव्ये अयोध्याकाण्डे चतुश्चत्वारिंशस्सर्गः॥Thus ends the fortyfourth sarga of Ayodhyakanda of the holy Ramayana, the first epic composed by sage Valmiki.पदच्छेदः
| निशम्य | निशम्य (√नि-शामय् + ल्यप्) |
| तल् | तद् (२.१) |
| लक्ष्मणमातृवाक्यं | लक्ष्मण–मातृ–वाक्य (२.१) |
| रामस्य | राम (६.१) |
| मातुर् | मातृ (६.१) |
| नरदेवपत्न्याः | नरदेव–पत्नी (६.१) |
| सद्यः | सद्यस् (अव्ययः) |
| शरीरे | शरीर (७.१) |
| विननाश | विननाश (√वि-नश् लिट् प्र.पु. एक.) |
| शोकः | शोक (१.१) |
| शरद्गतो | शरद्–गत (√गम् + क्त, १.१) |
| मेघ | मेघ (१.१) |
| इवाल्पतोयः | इव (अव्ययः)–अल्प–तोय (१.१) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| नि | श | म्य | त | ल्ल | क्ष्म | ण | मा | तृ | वा | क्यं |
| रा | म | स्य | मा | तु | र्न | र | दे | व | प | त्न्याः |
| स | द्यः | श | री | रे | वि | न | ना | श | शो | कः |
| श | र | द्ग | तो | मे | घ | इ | वा | ल्प | तो | यः |