अन्वयः
किन्तु yet, धर्मनित्यानाम् those fixed in righteousness, सतां च virtuous people also, मनुष्याणाम् men's, कृतशोभि made propitious, चित्तम् mind, अनित्यम् इति is fickle, मे my, मतिः my opinion.
Summary
Yet I think even the propitious minds of those who are virtuous and whose thoughts are fixed in righteousness can also become fickle.
पदच्छेदः
| किं | क (१.१) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| चित्तं | चित्त (१.१) |
| मनुष्याणाम् | मनुष्य (६.३) |
| अनित्यम् | अनित्य (१.१) |
| इति | इति (अव्ययः) |
| मे | मद् (६.१) |
| मतिः | मति (१.१) |
| सतां | सत् (६.३) |
| च | च (अव्ययः) |
| धर्मनित्यानां | धर्म–नित्य (६.३) |
| कृतशोभि | कृत (√कृ + क्त)–शोभिन् (१.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| राघव | राघव (८.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| किं | तु | चि | त्तं | म | नु | ष्या | णा |
| म | नि | त्य | मि | ति | मे | म | तिः |
| स | तां | च | ध | र्म | नि | त्या | नां |
| कृ | त | शो | भि | च | रा | घ | व |