अन्वयः
सः रामः that Rama, तथा in that manner, सनियमामेव engaged in prayer, अभिगम्य having approached, अभिवाद्य च having made reverential salutation, ताम् her, हर्षयन् enhancing her joy, अनिन्दितां वचनम् words of praise, उवाच said.
Summary
While she (Kausalya) was in that state of meditation, Rama approached her, offered reverential salutation and said these words of praise enhancing her joy:
पदच्छेदः
| तथा | तथा (अव्ययः) |
| सनियमाम् | स (अव्ययः)–नियम (२.१) |
| एव | एव (अव्ययः) |
| सो | तद् (१.१) |
| ऽभिगम्याभिवाद्य | अभिगम्य (√अभि-गम् + ल्यप्)–अभिवाद्य (√अभि-वादय् + ल्यप्) |
| च | च (अव्ययः) |
| उवाच | उवाच (√वच् लिट् प्र.पु. एक.) |
| वचनं | वचन (२.१) |
| रामो | राम (१.१) |
| हर्षयंस् | हर्षयत् (√हर्षय् + शतृ, १.१) |
| ताम् | तद् (२.१) |
| इदं | इदम् (२.१) |
| तदा | तदा (अव्ययः) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| त | था | स | नि | य | मा | मे | व |
| सो | ऽभि | ग | म्या | भि | वा | द्य | च |
| उ | वा | च | व | च | नं | रा | मो |
| ह | र्ष | यं | स्ता | मि | दं | त | दा |