अन्वयः
इति thus, सूतवचः words of the charioteer, श्रुत्वा having heard, रामः Rama, अथ afterwards, त्वरया with haste, अन्वितः seized, नरेश्वरम् king, पुनः again, द्रष्टुम् to see, राजभवनम् to royal palace, प्रययौ departed.
Summary
On hearing the words of the charioteer, Rama immediately set out for the royal palace to see the king again.
पदच्छेदः
| इति | इति (अव्ययः) |
| सूतवचः | सूत–वचस् (२.१) |
| श्रुत्वा | श्रुत्वा (√श्रु + क्त्वा) |
| रामो | राम (१.१) |
| ऽथ | अथ (अव्ययः) |
| त्वरयान्वितः | त्वरा (३.१)–अन्वित (१.१) |
| प्रययौ | प्रययौ (√प्र-या लिट् प्र.पु. एक.) |
| राजभवनं | राजन्–भवन (२.१) |
| पुनर् | पुनर् (अव्ययः) |
| द्रष्टुं | द्रष्टुम् (√दृश् + तुमुन्) |
| नरेश्वरम् | नरेश्वर (२.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| इ | ति | सू | त | व | चः | श्रु | त्वा |
| रा | मो | ऽथ | त्व | र | या | न्वि | तः |
| प्र | य | यौ | रा | ज | भ | व | नं |
| पु | न | र्द्र | ष्टुं | न | रे | श्व | रम् |