वहन्तो जवना रामं भो भो जात्यास्तुरंगमाः ।
निवर्तध्वं न गन्तव्यं हिता भवत भर्तरि ।
उपवाह्यस्तु वो भर्ता नापवाह्यः पुराद्वनम् ॥
वहन्तो जवना रामं भो भो जात्यास्तुरंगमाः ।
निवर्तध्वं न गन्तव्यं हिता भवत भर्तरि ।
उपवाह्यस्तु वो भर्ता नापवाह्यः पुराद्वनम् ॥
अन्वयः
रामम् Rama, वहन्तः conveying, जवनाः swift, जात्याः of noble breed, भो भो तुरङ्गमाः O horses, निवर्तध्वम् turn back, न गन्तव्यम् do not proceed, भर्तरि in your master (Rama), हिताः भवत be good.M N Dutt
O you fleet coursers boasting of exalted extraction that bear Rāma away, do you desist, do not go; do you do even what is for the good of your master.Summary
O horses of noble breed, turn back Do not carry your master swiftyly any farther. Do good to him.पदच्छेदः
| वहन्तो | वहत् (√वह् + शतृ, १.३) |
| जवना | जवन (१.३) |
| रामं | राम (२.१) |
| भो | भो (अव्ययः) |
| भो | भो (अव्ययः) |
| जात्यास् | जात्य (८.३) |
| तुरंगमाः | तुरंगम (८.३) |
| निवर्तध्वं | निवर्तध्वम् (√नि-वृत् लोट् म.पु. द्वि.) |
| न | न (अव्ययः) |
| गन्तव्यं | गन्तव्य (√गम् + कृत्, १.१) |
| हिता | हित (१.३) |
| भवत | भवत (√भू लोट् म.पु. द्वि.) |
| भर्तरि | भर्तृ (७.१) |
| उपवाह्यस् | उपवाह्य (√उप-वह् + कृत्, १.१) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| वो | त्वद् (६.३) |
| भर्ता | भर्तृ (१.१) |
| नापवाह्यः | न (अव्ययः)–अपवाह्य (√अप-वाहय् + कृत्, १.१) |
| पुराद् | पुर (५.१) |
| वनम् | वन (२.१) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| व | ह | न्तो | ज | व | ना | रा | मं | भो | भो | जा | त्या |
| स्तु | रं | ग | माः | नि | व | र्त | ध्वं | न | ग | न्त | व्यं |
| हि | ता | भ | व | त | भ | र्त | रि | उ | प | वा | ह्य |
| स्तु | वो | भ | र्ता | ना | प | वा | ह्यः | पु | रा | द्व | नम् |