तथा स्त्रियो रामनिमित्तमातुरा; यथा सुते भ्रातरि वा विवासिते ।
विलप्य दीना रुरुदुर्विचेतसः; सुतैर्हि तासामधिको हि सोऽभवत् ॥
तथा स्त्रियो रामनिमित्तमातुरा; यथा सुते भ्रातरि वा विवासिते ।
विलप्य दीना रुरुदुर्विचेतसः; सुतैर्हि तासामधिको हि सोऽभवत् ॥
अन्वयः
स्त्रियः women, सुते when a son, भ्रातरिवा or brother, विवासिते exiled, यथा तथा in the same manner, राम निमित्तम् for the sake of Rama, आतुराः grieving, दीनाः dejected, विचेतसः with troubled minds, विलप्य having lamented, रुरुदुः wept, तासाम् for them, सः Rama, सुतैः more than sons, अधिकः more, अभवत् हि became indeed.M N Dutt
Distressed for the sake of Rāma as if it was a was son or a brother of theirs that was banished, the women weeping forlorn, lamented with senses lost; and Rāma was to them more than a son.Summary
The women grieved over Rama as if a son or a brother had been exiled. Depressed and distressed, they wept and sobbed. For them, Rama was indeed more than their sons.पदच्छेदः
| तथा | तथा (अव्ययः) |
| स्त्रियो | स्त्री (१.३) |
| रामनिमित्तम् | राम–निमित्त (२.१) |
| आतुरा | आतुर (१.३) |
| यथा | यथा (अव्ययः) |
| सुते | सुत (७.१) |
| भ्रातरि | भ्रातृ (७.१) |
| वा | वा (अव्ययः) |
| विवासिते | विवासित (√वि-वासय् + क्त, ७.१) |
| विलप्य | विलप्य (√वि-लप् + ल्यप्) |
| दीना | दीन (१.३) |
| रुरुदुर् | रुरुदुः (√रुद् लिट् प्र.पु. बहु.) |
| विचेतसः | विचेतस् (१.३) |
| सुतैर् | सुत (३.३) |
| हि | हि (अव्ययः) |
| तासाम् | तद् (६.३) |
| अधिको | अधिक (१.१) |
| हि | हि (अव्ययः) |
| सो | तद् (१.१) |
| ऽभवत् | अभवत् (√भू लङ् प्र.पु. एक.) |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | था | स्त्रि | यो | रा | म | नि | मि | त्त | मा | तु | रा |
| य | था | सु | ते | भ्रा | त | रि | वा | वि | वा | सि | ते |
| वि | ल | प्य | दी | ना | रु | रु | दु | र्वि | चे | त | सः |
| सु | तै | र्हि | ता | सा | म | धि | को | हि | सो | ऽभ | वत् |
| ज | त | ज | र | ||||||||