अन्वयः
मे पिता my father, अतिक्रान्तमतिक्रान्तम् past is past, मनोरथम् his desire, अनवाप्य without fulfilling, राज्ये in the kingdom, रामम् Rama, अनिक्षिप्य without installing, विनशिष्यति will die.
M N Dutt
Saying, All is lost, All is lost, with his desire unattained, my father having failed to install Rāma in the kingdom, will resign his existence.
Summary
Past is past (irreversible). My father, brooding over his desire of installing Rama as king unfulfilled, will perish.
पदच्छेदः
| अतिक्रान्तम् | अतिक्रान्त (√अति-क्रम् + क्त, २.१)–अतिक्रान्त (√अति-क्रम् + क्त, २.१) |
| अतिक्रान्तम् | अतिक्रान्त (√अति-क्रम् + क्त, २.१)–अतिक्रान्त (√अति-क्रम् + क्त, २.१) |
| अनवाप्य | अनवाप्य (अव्ययः)–अनवाप्य (अव्ययः) |
| मनोरथम् | मनोरथ (२.१)–मनोरथ (२.१) |
| राज्ये | राज्य (७.१)–राज्य (७.१) |
| रामम् | राम (२.१)–राम (२.१) |
| अनिक्षिप्य | अनिक्षिप्य (अव्ययः)–अनिक्षिप्य (अव्ययः) |
| पिता | पितृ (१.१)–पितृ (१.१) |
| मे | मद् (६.१)–मद् (६.१) |
| विनशिष्यति | विनशिष्यति (√वि-नश् लृट् प्र.पु. एक.)–विनशिष्यति (√वि-नश् लृट् प्र.पु. एक.) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| अ | ति | क्रा | न्त | म | ति | क्रा | न्त |
| म | न | वा | प्य | म | नो | र | थम् |
| रा | ज्ये | रा | म | म | नि | क्षि | प्य |
| पि | ता | मे | वि | न | शि | ष्य | ति |