पदच्छेदः
| आरामोद्यानसम्पन्नां | आराम–उद्यान–सम्पन्न (√सम्-पद् + क्त, २.१) |
| समाजोत्सवशालिनीम् | समाज–उत्सव–शालिन् (२.१) |
| सुखिता | सुखित (१.३)–सुखित (१.३) |
| विचरिष्यन्ति | विचरिष्यन्ति (√वि-चर् लृट् प्र.पु. बहु.)–विचरिष्यन्ति (√वि-चर् लृट् प्र.पु. बहु.) |
| राजधानीं | राजधानी (२.१)–राजधानी (२.१) |
| पितुर् | पितृ (६.१)–पितृ (६.१) |
| मम | मद् (६.१)–मद् (६.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| आ | रा | मो | द्या | न | सं | प | न्नां |
| स | मा | जो | त्स | व | शा | लि | नीम् |
| सु | खि | ता | वि | च | रि | ष्य | न्ति |
| रा | ज | धा | नीं | पि | तु | र्म | म |