अन्वयः
सूतः charioteer, प्राञ्जलि: with folded hands, विनीतवत् humbly, धर्मज्ञम् righteous, राममेव तु near Rama, उपगम्य going towards, अहम् I, किम् what, करवाणि do you want me to do , इति this, अब्रवीत् asked.
M N Dutt
Then coming forward in humble guise before Rāma cognizant of virtue, the charioteer said with joined hands, "What shall I do (now)?"
Summary
The charioteer (Sumantra) approached the righteous Rama and asked him with folded hands: What can I do?
पदच्छेदः
| रामम् | राम (२.१) |
| एव | एव (अव्ययः) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| धर्मज्ञम् | धर्म–ज्ञ (२.१) |
| उपगम्य | उपगम्य (√उप-गम् + ल्यप्) |
| विनीतवत् | विनीत (√वि-नी + क्त)–वत् (अव्ययः) |
| किम् | क (२.१) |
| अहं | मद् (१.१) |
| करवाणीति | करवाणि (√कृ लोट् उ.पु. )–इति (अव्ययः) |
| सूतः | सूत (१.१) |
| प्राञ्जलिर् | प्राञ्जलि (१.१) |
| अब्रवीत् | अब्रवीत् (√ब्रू लङ् प्र.पु. एक.) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| रा | म | मे | व | तु | ध | र्म | ज्ञ |
| मु | प | ग | म्य | वि | नी | त | वत् |
| कि | म | हं | क | र | वा | णी | ति |
| सू | तः | प्रा | ञ्ज | लि | र | ब्र | वीत् |