अन्वयः
मम myself, एतावत् till here, कृतं हि brought, निवर्तस्व return, रथम् chariot, विहाय leaving, पद्भ्याम् on foot, महावनम् the great forest, गमिष्यामि wiill go, इति this, उवाच said.
M N Dutt
“Do you” said he to the charioteer, "turn back, So far I have come (in obedience to the order of the monarch.) Now, renouncing the car, will I repair to the mighty forest on foot."
Summary
You have done enough. I shall now leave the chariot and walk into the great forest.
पदच्छेदः
| निवर्तस्वेत्य् | निवर्तस्व (√नि-वृत् लोट् म.पु. )–इति (अव्ययः) |
| उवाचैनम् | उवाच (√वच् लिट् प्र.पु. एक.)–एनद् (२.१) |
| एतावद्धि | एतावत् (२.१)–हि (अव्ययः) |
| कृतं | कृत (√कृ + क्त, १.१) |
| मम | मद् (६.१) |
| यानं | यान (२.१) |
| विहाय | विहाय (√वि-हा + ल्यप्) |
| पद्भ्यां | पद् (३.२) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| गमिष्यामो | गमिष्यामः (√गम् लृट् उ.पु. द्वि.) |
| महावनम् | महत्–वन (२.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| नि | व | र्त | स्वे | त्यु | वा | चै | न |
| मे | ता | व | द्धि | कृ | तं | म | म |
| या | नं | वि | हा | य | प | द्भ्यां | तु |
| ग | मि | ष्या | मो | म | हा | व | नम् |