अन्वयः
अनिन्दिता blameless, वैदेही Sita, भागीरथ्याः river Bhagheerathi's, मध्यम् middle, समनुप्राप्य having reached, प्राञ्जलिः भूत्वा with folded palms, तां नदीम् to that river, इदम् these words, अब्रवीत् uttered.
M N Dutt
Having arrived at the middle of the Bhagirathi, that blameless one, Vaidehi, with joined hands, addressed the river, saying.
Summary
When the boat reached the midstream that unblemished Sita with palms folded invoked the river thus:
पदच्छेदः
| मध्यं | मध्य (२.१) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| समनुप्राप्य | समनुप्राप्य (√समनुप्र-आप् + ल्यप्) |
| भागीरथ्यास् | भागीरथी (६.१) |
| त्व् | तु (अव्ययः) |
| अनिन्दिता | अनिन्दित (१.१) |
| वैदेही | वैदेही (१.१) |
| प्राञ्जलिर् | प्राञ्जलि (१.१) |
| भूत्वा | भूत्वा (√भू + क्त्वा) |
| तां | तद् (२.१) |
| नदीम् | नदी (२.१) |
| इदम् | इदम् (२.१) |
| अब्रवीत् | अब्रवीत् (√ब्रू लङ् प्र.पु. एक.) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| म | ध्यं | तु | स | म | नु | प्रा | प्य |
| भा | गी | र | थ्या | स्त्व | नि | न्दि | ता |
| वै | दे | ही | प्रा | ञ्ज | लि | र्भू | त्वा |
| तां | न | दी | मि | द | म | ब्र | वीत् |