अन्वयः
लक्ष्मण O Lakshmana, अद्य at this time, महाराजः the great king, ध्रुवम् surely, दुःखम् with difficulty, स्वपिति sleeps, कृतकामा with the desires fulfilled, कैकेयी तु however Kaikeyi, तुष्टा satisfed, भवितुम् अर्हति should become.
M N Dutt
O Lakşmaņa, surely the king sleeps uneasily to day, and Kaikeyi having attained her end ought to be satisfied.
Summary
O Lakshmana, the maharaja must be having a painful sleep tonight. But Kaikeyi with her desires fulfilled, ought to feel satisfied.
पदच्छेदः
| ध्रुवम् | ध्रुवम् (अव्ययः) |
| अद्य | अद्य (अव्ययः) |
| महाराजो | महत्–राज (१.१) |
| दुःखं | दुःख (२.१) |
| स्वपिति | स्वपिति (√स्वप् लट् प्र.पु. एक.) |
| लक्ष्मण | लक्ष्मण (८.१) |
| कृतकामा | कृत (√कृ + क्त)–काम (१.१) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| कैकेयी | कैकेयी (१.१) |
| तुष्टा | तुष्ट (√तुष् + क्त, १.१) |
| भवितुम् | भवितुम् (√भू + तुमुन्) |
| अर्हति | अर्हति (√अर्ह् लट् प्र.पु. एक.) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| ध्रु | व | म | द्य | म | हा | रा | जो |
| दुः | खं | स्व | पि | ति | ल | क्ष्म | ण |
| कृ | त | का | मा | तु | कै | के | यी |
| तु | ष्टा | भ | वि | तु | म | र्ह | ति |