अन्वयः
तस्याम् रात्र्याम् when that night, व्युष्टायाम् had come to a close, भरद्वाजः Bharadwaja, मधुमूलफलोपेतम् abounding in honey, roots, and fruits, चित्रकूटम् to Chitrakuta, व्रज go, इति thus, इदम् these words, अब्रवीत् said.
Summary
When the night came to a close, Bharadwaja said (to Rama): You may proceed to Chitrakuta which abounds in roots, fruits and honey.
पदच्छेदः
| रात्र्यां | रात्रि (७.१) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| तस्यां | तद् (७.१) |
| व्युष्टायां | व्युष्ट (√वि-वस् + क्त, ७.१) |
| भरद्वाजो | भरद्वाज (१.१) |
| ऽब्रवीद् | अब्रवीत् (√ब्रू लङ् प्र.पु. एक.) |
| इदम् | इदम् (२.१) |
| मधुमूलफलोपेतं | मधु–मूल–फल–उपेत (√उप-इ + क्त, २.१) |
| चित्रकूटं | चित्रकूट (२.१) |
| व्रजेति | व्रज (√व्रज् लोट् म.पु. )–इति (अव्ययः) |
| ह | ह (अव्ययः) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| रा | त्र्यां | तु | त | स्यां | व्यु | ष्टा | यां |
| भ | र | द्वा | जो | ऽब्र | वी | दि | दम् |
| म | धु | मू | ल | फ | लो | पे | तं |
| चि | त्र | कू | टं | व्र | जे | ति | ह |