प्रस्थितांश्चैव तान्प्रेक्ष्य पिता पुत्रानिवान्वगात् ।
ततः प्रचक्रमे वक्तुं वचनं स महामुनिः ॥
प्रस्थितांश्चैव तान्प्रेक्ष्य पिता पुत्रानिवान्वगात् ।
ततः प्रचक्रमे वक्तुं वचनं स महामुनिः ॥
अन्वयः
सः महर्षिः that great sage, तेषाम् to them, स्वस्त्ययनम् blessings for their safe journey, चकार ह made, प्रस्थितान् set forth, तान् them, प्रेक्ष्य having seen, पिता father, पुत्रानिव like his own children, अन्वगात् च followed also.Summary
Seeing them setting forth, the great sage blessed them for a safe journey and followed them like a father following his children.पदच्छेदः
| प्रस्थितांश् | प्रस्थित (√प्र-स्था + क्त, २.३) |
| चैव | च (अव्ययः)–एव (अव्ययः) |
| तान् | तद् (२.३) |
| प्रेक्ष्य | प्रेक्ष्य (√प्र-ईक्ष् + ल्यप्) |
| पिता | पितृ (१.१) |
| पुत्रान् | पुत्र (२.३) |
| इवान्वगात् | इव (अव्ययः)–अन्वगात् (√अनु-गा प्र.पु. एक.) |
| ततः | ततस् (अव्ययः) |
| प्रचक्रमे | प्रचक्रमे (√प्र-क्रम् लिट् प्र.पु. एक.) |
| वक्तुं | वक्तुम् (√वच् + तुमुन्) |
| वचनं | वचन (२.१) |
| स | तद् (१.१) |
| महामुनिः | महत्–मुनि (१.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| प्र | स्थि | तां | श्चै | व | ता | न्प्रे | क्ष्य |
| पि | ता | पु | त्रा | नि | वा | न्व | गात् |
| त | तः | प्र | च | क्र | मे | व | क्तुं |
| व | च | नं | स | म | हा | मु | निः |