अन्वयः
प्रजालङ्कारभूतम् like an ornament for people, जनस्य for men, आनन्दवर्धनम् enhancing joy, तम् अयोध्यामहोत्सवम् that great festival of Ayodhya, द्रष्टुम् to witness, जनः men, उत्सुकः अभूत् became anxious.
Summary
People were anxious to witness that great festival of Ayodhya which was to them (precious) like an ornament and a source of immense joy.
पदच्छेदः
| प्रजालंकारभूतं | प्रजा–अलंकार–भूत (√भू + क्त, २.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| जनस्यानन्दवर्धनम् | जन (६.१)–आनन्द–वर्धन (२.१) |
| उत्सुको | उत्सुक (१.१) |
| ऽभूज् | अभूत् (√भू प्र.पु. एक.) |
| जनो | जन (१.१) |
| द्रष्टुं | द्रष्टुम् (√दृश् + तुमुन्) |
| तम् | तद् (२.१) |
| अयोध्यामहोत्सवम् | अयोध्या–महत्–उत्सव (२.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| प्र | जा | लं | का | र | भू | तं | च |
| ज | न | स्या | न | न्द | व | र्ध | नम् |
| उ | त्सु | को | ऽभू | ज्ज | नो | द्र | ष्टुं |
| त | म | यो | ध्या | म | हो | त्स | वम् |