अन्वयः
सः रामः that Rama, मानार्हम् worthy of honour, आगतम् who arrived pale, तम् ऋषिम् to the sage (Vasistha), मानयिष्यन् to pay respect, त्वरन्निव quickly, ससम्भ्रमः in great excitement, निवेशनात् from his abode, निश्चक्राम came out.
Summary
Seeing the venerable sage(Vasitha) arrive, Rama quickly came out of his abode in great excitement to receive him with honour.
पदच्छेदः
| तम् | तद् (२.१) |
| आगतम् | आगत (√आ-गम् + क्त, २.१) |
| ऋषिं | ऋषि (२.१) |
| रामस् | राम (१.१) |
| त्वरन्न् | त्वरत् (√त्वर् + शतृ, १.१) |
| इव | इव (अव्ययः) |
| ससंभ्रमः | स (अव्ययः)–सम्भ्रम (१.१) |
| मानयिष्यन् | मानयिष्यत् (√मानय् + कृत्, १.१) |
| स | तद् (१.१) |
| मानार्हं | मान–अर्ह (२.१) |
| निश्चक्राम | निश्चक्राम (√निः-क्रम् लिट् प्र.पु. एक.) |
| निवेशनात् | निवेशन (५.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| त | मा | ग | त | मृ | षिं | रा | म |
| स्त्व | र | न्नि | व | स | सं | भ्र | मः |
| मा | न | यि | ष्य | न्स | मा | ना | र्हं |
| नि | श्च | क्रा | म | नि | वे | श | नात् |