अन्वयः
मनीषिणः sagacious Vasistha's, रथाभ्याशम् near the chariot, त्वरमाणः hastening steps, अभ्येत्य having approached, ततः thereafter, रथात् from the chariot, स्वयम् personally , परिगृह्य holding(his hand), अवतारयामास got him alighted.
Summary
Hastening with rapid strides, Rama approached the chariot of the sagacious Vasistha and personally helped him alight from the chariot.
पदच्छेदः
| अभ्येत्य | अभ्येत्य (√अभ्या-इ + ल्यप्) |
| त्वरमाणश् | त्वरमाण (√त्वर् + शानच्, १.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| रथाभ्याशं | रथ–अभ्याश (२.१) |
| मनीषिणः | मनीषिन् (६.१) |
| ततो | ततस् (अव्ययः) |
| ऽवतारयामास | अवतारयामास (√अव-तारय् प्र.पु. एक.) |
| परिगृह्य | परिगृह्य (√परि-ग्रह् + ल्यप्) |
| रथात् | रथ (५.१) |
| स्वयम् | स्वयम् (अव्ययः) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| अ | भ्ये | त्य | त्व | र | मा | ण | श्च |
| र | था | भ्या | शं | म | नी | षि | णः |
| त | तो | ऽव | ता | र | या | मा | स |
| प | रि | गृ | ह्य | र | था | त्स्व | यम् |