तथैव रामोऽश्रुमुखः कृताञ्जलिः; स्थितोऽभवल्लक्ष्मणबाहुपालितः ।
तथैव सीता रुदती तपस्विनी; निरीक्षते राजरथं तथैव माम् ॥
तथैव रामोऽश्रुमुखः कृताञ्जलिः; स्थितोऽभवल्लक्ष्मणबाहुपालितः ।
तथैव सीता रुदती तपस्विनी; निरीक्षते राजरथं तथैव माम् ॥
अन्वयः
तथैव thus, रामः Rama, अश्रुमुखः with his face filled with tears, कृताञ्जलिः with folded hands, लक्ष्मणबाहुपालितः supported by the arms of Lakshmana, स्थितः अभवत् stood, तपस्विनी pitiable, सीता Sita, रुदती weeping, राजरथम् king's chariot, माम् me, निरीक्षते kept gazing.M N Dutt
Thus said Rāma ministered to by Lakşmaņa, with a tearful countenance; and thus stood the unfortunate and weeping Sītå beholding the royal car and myself.Summary
Supported by Lakshmana's arms, Rama stood, his face streaming with tears and palms folded, while the wretched Sita, glaring at me and the royal chariot, weeping. इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीय आदिकाव्ये अयोध्याकाण्डे अष्टपञ्चाशस्सर्गः॥Thus ends the fiftyeighth sarga in Ayodhyakanda of the holy Ramayana, the first epic composed by sage Valmiki.पदच्छेदः
| तथैव | तथा (अव्ययः)–एव (अव्ययः) |
| रामो | राम (१.१) |
| ऽश्रुमुखः | अश्रु–मुख (१.१) |
| कृताञ्जलिः | कृत (√कृ + क्त)–अञ्जलि (१.१) |
| स्थितो | स्थित (√स्था + क्त, १.१) |
| ऽभवल् | अभवत् (√भू लङ् प्र.पु. एक.) |
| लक्ष्मणबाहुपालितः | लक्ष्मण–बाहु–पालित (√पालय् + क्त, १.१) |
| तथैव | तथा (अव्ययः)–एव (अव्ययः) |
| सीता | सीता (१.१) |
| रुदती | रुदत् (√रुद् + शतृ, १.१) |
| तपस्विनी | तपस्विनी (१.१) |
| निरीक्षते | निरीक्षते (√निः-ईक्ष् लट् प्र.पु. एक.) |
| राजरथं | राजन्–रथ (२.१) |
| तथैव | तथा (अव्ययः)–एव (अव्ययः) |
| माम् | मद् (२.१) |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | थै | व | रा | मो | ऽश्रु | मु | खः | कृ | ता | ञ्ज | लिः |
| स्थि | तो | ऽभ | व | ल्ल | क्ष्म | ण | बा | हु | पा | लि | तः |
| त | थै | व | सी | ता | रु | द | ती | त | प | स्वि | नी |
| नि | री | क्ष | ते | रा | ज | र | थं | त | थै | व | माम् |
| ज | त | ज | र | ||||||||