इति विलपति पार्थिवे प्रनष्टे; करुणतरं द्विगुणं च रामहेतोः ।
वचनमनुनिशम्य तस्य देवी; भयमगमत्पुनरेव राममाता ॥
इति विलपति पार्थिवे प्रनष्टे; करुणतरं द्विगुणं च रामहेतोः ।
वचनमनुनिशम्य तस्य देवी; भयमगमत्पुनरेव राममाता ॥
अन्वयः
पार्थिवे king, रामहेतोः for the sake of Rama, करुणतरम् in greater grief, द्विगुणं च doubly, विलपति lamenting, प्रणष्टे losing senses, राममाता Rama's mother, देवी queen Kausalya, तस्य वचनम् his words, अनुनिशम्य having heard, पुनरेव once again, भयम् fear, अगमत् seized.M N Dutt
On the king swooning away lamenting, that exalted lady, Rāma's mother, hearing his words doubly bitter and more piteous than ever uttered for Rāma, was seized with fresh apprehension.Summary
Wailing, Dasaratha fell unconscious. He was doubly grieved due to his yearning for Rama. Rama's mother was seized with fear hearing those lamentations.इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीय आदिकाव्ये अयोध्याकाण्डे एकोनषष्टितमस्सर्गः॥Thus ends the fiftyninth sarga in Ayodhyakanda of the holy Ramayana, the first epic composed by sage Valmiki.पदच्छेदः
| इति | इति (अव्ययः) |
| विलपति | विलपत् (√वि-लप् + शतृ, ७.१) |
| पार्थिवे | पार्थिव (७.१) |
| प्रनष्टे | प्रनष्ट (√प्र-नश् + क्त, ७.१) |
| करुणतरं | करुणतर (२.१) |
| द्विगुणं | द्विगुण (२.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| रामहेतोः | राम–हेतु (५.१) |
| वचनम् | वचन (२.१) |
| अनुनिशम्य | अनुनिशम्य (√अनुनि-शम् + ल्यप्) |
| तस्य | तद् (६.१) |
| देवी | देवी (१.१) |
| भयम् | भय (२.१) |
| अगमत् | अगमत् (√गम् प्र.पु. एक.) |
| पुनर् | पुनर् (अव्ययः) |
| एव | एव (अव्ययः) |
| राममाता | राम–मातृ (१.१) |
छन्दः
पुष्पिताग्रा []छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| इ | ति | वि | ल | प | ति | पा | र्थि | वे | प्र | न | ष्टे | |
| क | रु | ण | त | रं | द्वि | गु | णं | च | रा | म | हे | तोः |
| व | च | न | म | नु | नि | श | म्य | त | स्य | दे | वी | |
| भ | य | म | ग | म | त्पु | न | रे | व | रा | म | मा | ता |