तथापि सूतेन सुयुक्तवादिना; निवार्यमाणा सुतशोककर्शिता ।
न चैव देवी विरराम कूजिता;त्प्रियेति पुत्रेति च राघवेति च ॥
तथापि सूतेन सुयुक्तवादिना; निवार्यमाणा सुतशोककर्शिता ।
न चैव देवी विरराम कूजिता;त्प्रियेति पुत्रेति च राघवेति च ॥
अन्वयः
सुयुक्तवादिना by one who was speaking befittingly, सूतेना by Sumantra, तथा like that, निवार्यमाणापि though prevented, देवी queen Kausalya, सुतशोककर्शिता enfeebled with weeping over her son, प्रियेति 'O My beloved', पुत्रेति 'O my son', राघवेति च 'O Rama', कूजितात् from crying, नचैव विरराम did not stop.M N Dutt
Consoled by the truth-telling yet sweetspeeched charioteer, that lady oppressed with grief for her son, ceased not to wail loudly, "My beloved,” “My son," "Rāghava."Summary
Though Sumantra was speaking with befitting words to prevent Kausalya from weeping over her son which had enfeebled her, she did not stop crying, 'O my beloved', 'O my son', 'O Rama'. इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीय आदिकाव्ये अयोध्याकाण्डे षष्टितमस्सर्गः॥Thus ends the sixtieth sarga in Ayodhyakanda of the holy Ramayana, the first epic composed by sage Valmiki.पदच्छेदः
| तथापि | तथा (अव्ययः)–अपि (अव्ययः) |
| सूतेन | सूत (३.१) |
| सुयुक्तवादिना | सु (अव्ययः)–युक्त–वादिन् (३.१) |
| निवार्यमाणा | निवार्यमाण (√नि-वारय् + शानच्, १.१) |
| सुतशोककर्शिता | सुत–शोक–कर्शित (√कर्शय् + क्त, १.१) |
| न | न (अव्ययः) |
| चैव | च (अव्ययः)–एव (अव्ययः) |
| देवी | देवी (१.१) |
| विरराम | विरराम (√वि-रम् लिट् प्र.पु. एक.) |
| कूजितात् | कूजित (५.१) |
| प्रियेति | प्रिय (८.१)–इति (अव्ययः) |
| पुत्रेति | पुत्र (८.१)–इति (अव्ययः) |
| च | च (अव्ययः) |
| राघवेति | राघव (८.१)–इति (अव्ययः) |
| च | च (अव्ययः) |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | था | पि | सू | ते | न | सु | यु | क्त | वा | दि | ना |
| नि | वा | र्य | मा | णा | सु | त | शो | क | क | र्शि | ता |
| न | चै | व | दे | वी | वि | र | रा | म | कू | जि | ता |
| त्प्रि | ये | ति | पु | त्रे | ति | च | रा | घ | वे | ति | च |
| ज | त | ज | र | ||||||||