अन्वयः
वीर O heroic one, या whoever, श्लाघनीयेन by the praiseworthy, धीमता sagacious one, पत्या by the husband, सम्प्रसाद्यते is appeased, सा एषा such this, स्त्री woman, उभयोः both, लोकयोः worlds, न भवति हि does not belong.
M N Dutt
She cannot be reckoned a gentlewoman, who is propitiated by her intelligent husband, worthy of being extolled in both worlds.
Summary
O heroic one a woman, who is entreated by her sagacious and praiseworthy husband, loses both the worlds.
पदच्छेदः
| नैषा | न (अव्ययः)–एतद् (१.१) |
| हि | हि (अव्ययः) |
| सा | तद् (१.१) |
| स्त्री | स्त्री (१.१) |
| भवति | भवति (√भू लट् प्र.पु. एक.) |
| श्लाघनीयेन | श्लाघनीय (√श्लाघ् + अनीयर्, ३.१) |
| धीमता | धीमत् (३.१) |
| उभयोर् | उभय (७.२) |
| लोकयोर् | लोक (७.२) |
| वीर | वीर (८.१) |
| पत्या | पति (३.१) |
| या | यद् (१.१) |
| संप्रसाद्यते | संप्रसाद्यते (√संप्र-सादय् प्र.पु. एक.) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| नै | षा | हि | सा | स्त्री | भ | व | ति |
| श्ला | घ | नी | ये | न | धी | म | ता |
| उ | भ | यो | र्लो | क | यो | र्वी | र |
| प | त्या | या | सं | प्र | सा | द्य | ते |