अन्वयः
वत्स O son, अन्धाम् blind, वृद्धाम् old, तपस्विनीम् miserable, कृपणाम् wretched, पुत्रगर्धिनीम् yearning for her son, इमाम् this, ते your, मातरम् mother, कथम् how, भरिष्यामि support her?
M N Dutt
And, my son, how will I maintain this blind ascetic mother of yours, proud of her son, who is passing her days in misery?
Summary
'O son how can I support your wretched and pitiable mother, who is blind, old and yearning for her son?
पदच्छेदः
| इमाम् | इदम् (२.१) |
| अन्धां | अन्ध (२.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| वृद्धां | वृद्ध (२.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| मातरं | मातृ (२.१) |
| ते | त्वद् (६.१) |
| तपस्विनीम् | तपस्विनी (२.१) |
| कथं | कथम् (अव्ययः) |
| पुत्र | पुत्र (८.१) |
| भरिष्यामि | भरिष्यामि (√भृ लृट् उ.पु. ) |
| कृपणां | कृपण (२.१) |
| पुत्रगर्धिनीम् | पुत्र–गर्धिन् (२.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| इ | मा | म | न्धां | च | वृ | द्धां | च |
| मा | त | रं | ते | त | प | स्वि | नीम् |
| क | थं | पु | त्र | भ | रि | ष्या | मि |
| कृ | प | णां | पु | त्र | ग | र्धि | नीम् |