अन्वयः
यत्प्रसादेन by whose grace, अभिषिक्तम् having been coronated, रामम् of Rama, द्रक्ष्यामहे we are beholding, धर्मात्मा virtuous, अनघः sinless, दशरथः राजा king Dasaratha, चिरम् for long, जीवतु let live.
Summary
May the virtuous and sinless king Dasaratha live long by whose grace we are beholding (going to behold) Rama's coronation.
पदच्छेदः
| चिरं | चिरम् (अव्ययः) |
| जीवतु | जीवतु (√जीव् लोट् प्र.पु. एक.) |
| धर्मात्मा | धर्म–आत्मन् (१.१) |
| राजा | राजन् (१.१) |
| दशरथो | दशरथ (१.१) |
| ऽनघः | अनघ (१.१) |
| यत्प्रसादेनाभिषिक्तं | यद्–प्रसाद (३.१)–अभिषिक्त (√अभि-सिच् + क्त, २.१) |
| रामं | राम (२.१) |
| द्रक्ष्यामहे | द्रक्ष्यामहे (√दृश् लृट् उ.पु. द्वि.) |
| वयम् | मद् (१.३) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| चि | रं | जी | व | तु | ध | र्मा | त्मा |
| रा | जा | द | श | र | थो | ऽन | घः |
| य | त्प्र | सा | दे | ना | भि | षि | क्तं |
| रा | मं | द्र | क्ष्या | म | हे | व | यम् |