अन्वयः
शिरसा with head, प्रणत: bowed low, मधुसूदनम् Lord Visnu, तुष्टाव extoled, विमलक्षौमसंवीतः dressed in spotless silk garments, द्विजान् to brahmins, वाचयामास got the purificatory mantras recited.
Summary
Clad in spotless silk garments, he extoled Lord Madhusudana (Visnu) with his head bowed low. He listened to the purificatory mantras recited by brahmins.
पदच्छेदः
| तुष्टाव | तुष्टाव (√स्तु लिट् प्र.पु. एक.) |
| प्रणतश् | प्रणत (√प्र-नम् + क्त, १.१) |
| चैव | च (अव्ययः)–एव (अव्ययः) |
| शिरसा | शिरस् (३.१) |
| मधुसूदनम् | मधुसूदन (२.१) |
| विमलक्षौमसंवीतो | विमल–क्षौम–संवीत (√सम्-व्ये + क्त, १.१) |
| वाचयामास | वाचयामास (√वाचय् प्र.पु. एक.) |
| च | च (अव्ययः) |
| द्विजान् | द्विज (२.३) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| तु | ष्टा | व | प्र | ण | त | श्चै | व |
| शि | र | सा | म | धु | सू | द | नम् |
| वि | म | ल | क्षौ | म | सं | वी | तो |
| वा | च | या | मा | स | च | द्वि | जान् |