व्युष्टामेव तु तां रात्रिं दृष्ट्वा तं स्वप्नमप्रियम् ।
पुत्रो राजाधिराजस्य सुभृशं पर्यतप्यत ॥
व्युष्टामेव तु तां रात्रिं दृष्ट्वा तं स्वप्नमप्रियम् ।
पुत्रो राजाधिराजस्य सुभृशं पर्यतप्यत ॥
अन्वयः
राजाधिराजस्य (the son) of the king of kings, पुत्रः son, तां रात्रिम् that night, व्युष्टाम् एव when dawn appeared, तम् that, अप्रियम् unpleasant, स्वप्नम् dream, दृष्ट्वा having seen, सुभृशम् extremely, पर्यतप्यत felt troubled.M N Dutt
And seeing that evil dream during the short hours, the son of that king of kings exceedingly burned in grief.Summary
The son of the king of kings (Bharata) felt extremely troubled hen he had an unpleasant dream at dawn.पदच्छेदः
| व्युष्टाम् | व्युष्ट (√वि-वस् + क्त, २.१) |
| एव | एव (अव्ययः) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| तां | तद् (२.१) |
| रात्रिं | रात्रि (२.१) |
| दृष्ट्वा | दृष्ट्वा (√दृश् + क्त्वा) |
| तं | तद् (२.१) |
| स्वप्नम् | स्वप्न (२.१) |
| अप्रियम् | अप्रिय (२.१) |
| पुत्रो | पुत्र (१.१) |
| राजाधिराजस्य | राजन्–अधिराज (६.१) |
| सुभृशं | सु (अव्ययः)–भृशम् (अव्ययः) |
| पर्यतप्यत | पर्यतप्यत (√परि-तप् प्र.पु. एक.) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| व्यु | ष्टा | मे | व | तु | तां | रा | त्रिं |
| दृ | ष्ट्वा | तं | स्व | प्न | म | प्रि | यम् |
| पु | त्रो | रा | जा | धि | रा | ज | स्य |
| सु | भृ | शं | प | र्य | त | प्य | त |